
ड्रामा · रोमांस
द लंचबॉक्स (2013)
The Lunchbox
20 सित॰ 2013105 मिनटहिन्दी
मुंबई की एक अकेली गृहिणी पति का ध्यान दोबारा पाने के लिए उसके लिए टिफ़िन बनाती है। डिलीवरी की गड़बड़ी से डिब्बा रिटायरमेंट के क़रीब पहुँचे एक विधुर अकाउंटेंट के पास चला जाता है, और दोनों के बीच चिट्ठियों का सिलसिला शुरू हो जाता है।
संपादकीय प्रीव्यू: आधिकारिक जानकारी, ट्रेलर और सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर लिखा गया — पूरी फिल्म देखकर नहीं।
कहानी
मुंबई की एक अकेली गृहिणी पति का ध्यान दोबारा पाने के लिए उसके लिए टिफ़िन बनाती है। डिलीवरी की गड़बड़ी से डिब्बा रिटायरमेंट के क़रीब पहुँचे एक विधुर अकाउंटेंट के पास चला जाता है, और दोनों के बीच चिट्ठियों का सिलसिला शुरू हो जाता है।
द लंचबॉक्स 2013 देखने से पहले जानने लायक बातें
द लंचबॉक्स 2013 लेखक-निर्देशक रितेश बत्रा की पहली फ़ीचर फ़िल्म है। इसकी कहानी मुंबई में है और ज़्यादातर हिंदी में, कुछ अंग्रेज़ी के साथ। शुरुआत छोटी और ठोस है: एक गृहिणी अपनी शादी में फिर से गर्मजोशी लाने के लिए टिफ़िन बनाती है, और मुंबई की मशहूर डिब्बा-डिलीवरी व्यवस्था उसे ग़लत आदमी तक पहुँचा देती है, जो रिटायरमेंट के क़रीब एक विधुर अकाउंटेंट है।
कहानी के बारे में आम तौर पर यही बताया जाता है कि इसके बाद लंचबॉक्स के भीतर ही एक अनपेक्षित पत्राचार चल पड़ता है। इससे ज़्यादा जानना ज़रूरी नहीं, और हमने स्पॉइलर से बचने के लिए यहीं रुकना चुना है। इस परिचय के लिए हमने फ़िल्म दोबारा नहीं देखी, इसलिए अलग-अलग अभिनय पर कोई राय नहीं दे रहे।
करीब 105 मिनट की यह फ़िल्म शांत और किरदारों पर टिकी है, पारंपरिक बॉलीवुड रोमांस से ज़्यादा एक छोटे कमरे की कहानी जैसी। किसी ख़ास मूड में देखनी हो तो यह जानना काम आएगा।
फ़ेस्टिवल, रिलीज़ और सम्मान
फ़िल्म का प्रीमियर 19 मई 2013 को कान फ़िल्म समारोह 2013 के इंटरनेशनल क्रिटिक्स वीक खंड में हुआ और इसे क्रिटिक्स वीक का दर्शक पुरस्कार (ग्रैंड रेल डोर) मिला। भारत में यह 20 सितंबर 2013 को रिलीज़ हुई। उत्तरी अमेरिका के अधिकार सोनी पिक्चर्स क्लासिक्स ने लिए, और 2015 के बाफ़्टा में इसे ग़ैर-अंग्रेज़ी सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म की श्रेणी में नामांकन मिला।
मुख्य संदर्भ में निर्माताओं के रूप में अनुराग कश्यप, गुनीत मोंगा और अरुण रंगाचारी के नाम हैं। स्रोतों के अनुसार भारत में यह 400 से ज़्यादा स्क्रीन पर लगी और उस समय व्यावसायिक रूप से सफल रही। एक छोटे बजट की फ़िल्म कितनी दूर तक पहुँची, इसके ये अच्छे संकेत हैं।
कलाकार और किसे पसंद आएगी
सूचीबद्ध कलाकारों में इरफ़ान ख़ान, निम्रत कौर, नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी, भारती आचरेकर और नकुल वैद शामिल हैं। स्रोत बताते हैं कि 2017 में हिंदी मीडियम के आने तक यह इरफ़ान ख़ान की सबसे ज़्यादा कमाई वाली हिंदी फ़िल्म थी, इसलिए उनके काम को समझने की शुरुआत के लिए यह स्वाभाविक चुनाव है।
हम किसी एक मौजूदा स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म की पुष्टि नहीं कर पाए, क्योंकि पुरानी फ़िल्मों के अधिकार अक्सर बदलते रहते हैं। अपने OTT ऐप या किसी वॉच-अवेलेबिलिटी साइट पर नाम खोज लें। यह फ़िल्म उन दर्शकों के लिए है जिन्हें अकेलेपन, खाने और शहरी ज़िंदगी पर धीमी, बारीक नज़र वाली कहानियाँ पसंद हैं। जिन्हें कहानी में ज़बरदस्त मोड़, गाने या तमाशा चाहिए, उन्हें शायद यह कम भाएगी।
किसे पसंद आएगी द लंचबॉक्स?
- शांत, किरदारों पर टिकी शहरी कहानियाँ पसंद करने वाले दर्शक
- इरफ़ान ख़ान की फ़िल्मों से शुरुआत करने वाले दर्शक
- फ़ेस्टिवल सर्किट के भारतीय सिनेमा के प्रशंसक
ट्रेलर
The Lunchbox- OFFICIAL TRAILER- ON BLU-RAY and DIGITAL – ट्रेलर · चैनल: Sony Pictures Entertainment
कलाकार
इरफ़ान ख़ानजन्म 1967 · Jaipur, Rajasthan
Nimrat Kaurजन्म 1982
नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ीजन्म 1974 · Budhana, Uttar Pradeshफोटो: TMDB
सवाल-जवाब
द लंचबॉक्स (2013) का निर्देशन किसने किया?
रितेश बत्रा ने इसे लिखा और निर्देशित किया। निर्माता अनुराग कश्यप, गुनीत मोंगा और अरुण रंगाचारी हैं।
क्या द लंचबॉक्स को कोई पुरस्कार मिला?
इसने कान 2013 में क्रिटिक्स वीक का दर्शक पुरस्कार (ग्रैंड रेल डोर) जीता और 2015 के बाफ़्टा में ग़ैर-अंग्रेज़ी सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म श्रेणी में नामांकित हुई।
द लंचबॉक्स कब रिलीज़ हुई?
द लंचबॉक्स 20 सित॰ 2013 को रिलीज़ हुई।
द लंचबॉक्स के निर्देशक कौन हैं?
द लंचबॉक्स के निर्देशक Ritesh Batra हैं।
द लंचबॉक्स कितनी लंबी है?
द लंचबॉक्स की अवधि 105 मिनट है।